मोदी सरकारविरोधात पुन्हा आंदोलनाचा अण्णा हजारे यांचा इशारा

टीम महाराष्ट्र देशा/प्रशांत झावरे :- जेष्ठ समाजसेवक पद्मभूषण डॉ.अण्णा हजारे यांनी मोदी सरकारविरोधात पुन्हा  एकदा आंदोलनाचा इशारा दिला आहे. येत्या २ ऑक्टोबर रोजी अण्णा राळेगणसिद्धी येथे उपोषणास बसणार आहेत. त्याची कारणे त्यांनी सरकारला पत्राद्वारे कळवली असून जर हजारे यांनी मांडलेल्या मागण्या मान्य केल्या नाहीत तर हे उपोषण होणार आहे.

डॉ.जितेंद्र सिंह, राज्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय नवी दिल्ली यांच्या नवे हे पत्र पाठविले असून त्याच्या प्रति देशाचे पंतप्रधान नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, देशाचे कृषी राज्यमंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत यांनाही पाठविल्या आहेत. हजारे यांनी २४ मार्च रोजी मोदी सरकारविरोधात निरनिराळ्या मागण्यांसाठी आंदोलन केले होते, आंदोलनाच्या ७ व्या दिवशी २९ मार्च रोजी महाराष्ट्राचे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या मध्यस्थीने देशाचे कृषी राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत यांनी अण्णा हजारे यांनी लेखी पत्र घेऊन उपोषण सोडले, परंतु अद्यापही सरकारने पत्रात उल्लेख केल्याप्रमाणे एकही मागणी मान्य केली नसून, त्यासंबंधी कोणतीही कार्यवाही केली नाही. सरकारला सत्तेवर येऊन ४ वर्षे झाली असून निवडणुकी अगोदर दिलेली आश्वासने सरकारने पाळली नसून ही जनतेची फसवणूक आहे असे अण्णांनी पत्रात म्हटले आहे.

अण्णा हजारे यांनी सरकारला इशारा दिला आहे की, आपण भ्रष्टाचार मुक्त भारत नारा निवडणुकी दरम्यान दिला होता, परंतु यावर कोणतीही कार्यवाही केली नसून लोकपाल, लोकायुक्त याविषयी कोणतीही कार्यवाही केली नाही, आपण उपोषण संपल्यानंतरही दोन महिन्यात कोणतेही उत्तर दिले नाही. आता जर सरकारने दिलेली आश्वासने पूर्ण केली नाही तर येत्या २ ऑक्टोबर रोजी अण्णा हजारे राळेगणसिद्धी येथे आंदोलन सुरू करणार आहेत.

अण्णा हजारे यांचे पत्र जसेच्या तसे

प्रति,
मा. डॉ. जितेंद्र सिंह जी,
राज्यमंत्री, प्रधानमंत्री कार्यालय,
नई दिल्ली.

विषय- भारत सरकार की और से अपने हस्ताक्षर के साथ 29 मार्च 2018 को किसानों की समस्या, लोकपाल, लोकायुक्त और कई प्रश्नों को ले कर आंदोलन किया था। उस वक्त आपने जो आश्वासन दिए थे उनकी पुर्तता होने के बारे में… आज आपकी सरकार को चार साल हो गए है। चौथे वर्धापन दिन पर स्मरणपत्र भेज रहा हूँ।

महोदय,
दिल्ली के रामलिला मैदान पर किसानों को खेती उपज पर आनेवाले खर्चे पर 50 प्रतिशत दाम बढाकर मिलें, कृषि मूल्य आयोग को स्वायत्तता प्रदान की जाए, इन मांगों को ले कर किसानों ने दिल्ली के रामलिला मैदान पर आंदोलन किया था। मेरे अनशन के सातवे दिन सरकार ने कृषि मूल्य आयोग को स्वायत्तता देने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिती का गठन कर के सरकार सकारात्मक कदम उठायेगी ऐसा आश्वासन दिया गया था।

किसानों के खेती उपज पर न्युनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारीत करते समय मूल्य से 50 प्रतिशत जादा मूल्य तय करने के बारे में केंद्र सरकार द्वारा निर्णय लिया जायेगा। बजेट के भाषण में इसका जिक्र किया गया है, ऐसा भी आपके द्वारा कहां गया था। अब आपकी सरकार को चार साल पुरे हो रहे है। लेकिन 29 मार्च को अनशन छोडते समय दिए गए आश्वासन के अनुसार अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।

वास्तव में चुनाव से पहले और चुनाव के प्रचार में आपकी सरकार ने जनता को आश्वासन दिया था और अनशन छोडते समय भी लिखित आश्वासन दिया था। दो माह से जादा समय हुआ है लेकिन अंमल नहीं हो रहा है। खेती पर निर्भर साठ साल उम्र के किसानों को 5 हजार रुपये पेन्शन मिलनी चाहिए। जो स्वामिनाथन कमिटी के अहवाल में शिफारिश की गई थी। आपने भी आश्वासन दिया था की कमिटी बनाई जायेगी और कमिट की रिपोर्ट आने पर कार्यवाही की जायेगी। कमिटी गठित की गई या नहीं इसके बारे में अब तक जानकारी नहीं मिली है। 2 अक्टुबर गांधीजी के जयंती तक आश्वासन पुरे करने है। इसका स्मरण आपको पहले भी दिया गया है।

कृषि उपज के लिए तकनिकी औजारों पर जीएसटी (GST) माफ करने के बारे में जीएसटी काऊंसिल के पास चार माह में रखा जायेगा ऐसा आश्वासन दिया था। लेकिन इस के बारे में क्या कार्यवाही हुई? अब तक जानकारी नहीं मिली।

लोकपाल, लोकायुक्त नियुक्ती के बारे में आपने आश्वासन दिया था। प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता में सिलेक्शन कमिटी होती है। वह कमिटी लोकपाल का चयन करती है। लेकिन उस चयन कमिटी में न्यायविद का पद रिक्त होने के कारण लोकपाल की नियुक्ती नहीं हो पायी। जल्द ही न्यायविद का पद भरा जायेगा और लोकपाल की नियुक्ती की जायेगी ऐसा आश्वासन आपके द्वारा दिया गया था।

वास्तव में आज आपकी सरकार सत्ता में आकर चार साल हो रहे है। लोकपाल, लोकायुक्त नियुक्ती भ्रष्टाचार को रोकने के लिए तथा समाज और देश के लिए महत्वपूर्ण विषय है। भ्रष्टाचार को रोकथाम लगाने के लिए यह एक क्रांतीकारी निर्णय है। अखबार के पन्ने भरकर आपने चार साल की जानकारी दी है। लेकिन चुनाव से पहले और चुनाव के प्रचार में भी हम भारतवासियों को आपने भ्रष्टाचार मुक्त भारत का आश्वासन दिया था। लेकिन चार साल में लोकपाल, लोकायुक्त नियुक्ती नहीं हुई, यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की आपकी सरकार की मन्शा नहीं है।

न्यायविद नियुक्त करने के लिए जादा समय ना जाते हुए जल्द से जल्द न्यायविद की नियुक्ती कर के लोकपाल की नियुक्ती होनी चाहिए। लोकायुक्त के लिए कोई दिक्कत नहीं थी। आपकी सरकार सत्ता में आते ही हर राज्य में लोकायुक्त नियुक्त कर सकते थे। लेकिन सरकार की मन्शा ना होने के कारण किसी भी राज्य में लोकायुक्त नियुक्त नहीं हो पाया। 2 अक्टूबर गांधी जी की जयंती तक लोकपाल, लोकायुक्त नियुक्ती हो जाए अन्यथा आपने आश्वासन की पूर्ती ना करने के कारण मेरा आंदोलन मेंरे गांव रालेगणसिद्धी में 2 अक्टूबर 2018 से फिर शुरू होगा।

आपकी सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की घोषणा की। लेकिन भ्रष्टाचार मुक्त भारत निर्माण के लिए लोकपाल, लोकायुक्त नियुक्ती नहीं की यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है। आश्वासन के दो माह में क्या कार्यवाही हुई है और आगे क्या कार्यवाही हो रही है इसके बारे में स्पष्टीकरण होना जरूरी है। मैने दो स्मरण पत्र दिए लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। सरकार अपने चार साल के कार्य की जानकारी तो अखबार के पन्ने-पन्ने भरकर दे रही है। लेकिन भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए लोकपाल, लोकायुक्त की जानकारी कही पर भी नहीं है यह दुर्भाग्य है।
स्मरण दे रहा हूँ की आश्वासन की पूर्ती नहीं हुई तो 02 अक्टूबर 2018 को मेरे गांव रालेगणसिद्धी में मेरा आंदोलन शुरू होगा।

भवदीय
कि. बा. तथा अन्ना हजारे